बेसिक शिक्षा मंच का राज्य स्तरीय कार्यक्रम – दिनांकः 22 व 23 नवम्बर 2013

बेसिक शिक्षा मंच का राज्य स्तरीय कार्यक्रम –

“विद्यालय प्रबंध समिति, शिक्षक-अभिभावक का साझा प्रयास और अभिभावक मंच से स्कूल और शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी” 
स्थानः यूथ हॉस्टल, लखनऊ दिनांकः 22 व 23 नवम्बर 2013

स्कूल और शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के संदर्भ में बेसिक शिक्षा मंच का सुझाव

प्रेस विज्ञप्ति
दिनांक 22 व 23 नवम्बर 2013 को जवाहर लाल नेहरू यूथ हॉस्टल लखनऊ (निकट रूमी गेट चौक) में बेसिक शिक्षा मंच का राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में राज्य के करीब 33 जिलों से स्वैच्छिक संस्थाओं, विद्यालय प्रबंध समितियों और शिक्षक समुदाय से करीब 150 लोग प्रतिभाग किये। कार्यक्रम के पहले दिन की चर्चा के आधार पर स्कूल और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, सभी बच्चों के शिक्षा हक को सुनिश्चित करने के लिए सरकार को देने के लिए सुझाव-पत्र तैयार किया गया। कार्यक्रम के दूसरे दिन बेसिक शिक्षा मंच का डेलिगेशन इस सुझाव-पत्र को शिक्षा मंत्री को और विभिन्न राजनीतिक दलों कोे उनके कार्यालयों में दिया गया। 

सम्मेलन में प्रतिभागियों का विचार था कि प्रदेश में जो पहल हुए हैं, उससे विद्यालय प्रबंध समितियों का गठन पिछले बार की तुलना में बेहतर तरीके से हो पाया है। इससे स्कूलों की बेहतरी में थोड़ी अधिक संभावना बनेगी। जरूरत है शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और बुनियादी बदलाव लाने की। इस संदर्भ में सम्मेलन में सरकार से मांग की गयी कि अभिभावकों और शिक्षकों को साझा प्रयास करने और उनके प्रयासों में समुचित सहयोग की व्यवस्था बनायी जाए। शिक्षकों को समुचित सलाह व सहयोग देकर विद्यालय प्रबंध समिति की मासिक बैठक करवाना सुनिश्चित किया जाए। विद्यालय प्रबंध समिति के अभिभावक सदस्यों की क्षमतावृद्धि की बेहतर व्यवस्था होने की जरूरत है। दो वर्ष के कार्यकाल में तीन सदस्यों का दो दिन का प्रशिक्षण कराकर हम ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते हैं। प्रदेश के कुछ विकास खंडों में विद्यालय प्रबंध समिति के अभिभावक सदस्यों ने संकुल स्तरीय अभिभावक मंच गठित कर नियमित रूप से राय सलाह करना शुरू किया है। इससे उन्हें स्कूलों में बेहतर भूमिका निभाने में मदद मिल रही है। सम्मेलन में इस पर विचार कर सरकार से मांग की गई है कि विद्यालय प्रबंध समिति की तरह ‘संकुल अभिभावक मंच’ को वैधानिक मान्यता दिया जाए।

बच्चों को भी शिक्षा अधिकार से अवगत कराने पर विचार किया गया। इसके लिए भाषा की पाठ्यपुस्तकों में उपयुक्त पाठ शामिल किये जाने की मांग उठी। ब्लाक, जिले व राज्य स्तर पर सरकार नियमित रूप से शिक्षा संवाद आयोजित कर सभी घटकों में साझी समझ, सामूहिक प्रयास व उपयुक्त कार्यप्रणाली को बढ़ावा दे, इसकी भी मांग की गई। सरकार से यह अपेक्षा की गई कि सरकार इस भ्रम को दूर करे कि गरीब माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा के लिए जागरूक नहीं है। स्कूल के शिक्षकगण व अभिभावक आपसी समझ व प्रयासों से स्कूल को प्रभावी बना सकते हैं बशर्ते कि उनके इस प्रयास में तंत्र का सहयोग हो।