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Pragya Cover Page Jan 2015

Teacher’s Bulletin PRAGYA, Issue 12 प्रज्ञा बुलेटिन का 12वां अंक जनवरी 2015 में प्रकाशित हुआ है। ‘शैक्षिक संवाद मंच’ के तहत शिक्षकों के द्वारा अपने प्रयासों को साझा करना और विचार विमर्श करना जारी है। बाँदा, रायबरेली, लखनऊ और प्रतापगढ़ जिलों के काफी शिक्षकों के द्वारा समय-समय पर स्वैच्छिक रूप से बैठकें की जा रही हैं। शिक्षा व्यवस्था की सीमाओं के बावजूद भी कई शिक्षक, बच्चों की भागीदारी और सीख को बढ़ावा दे पा रहे हैं। स्कूलों को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उपयुक्त बना पा रहे हैं। वे अपने इस प्रयास में अन्य शिक्षकों, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों, अभिभावकों आदि को सहयोगी बना रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था से भी सहयोग ले रहे हैं। कई स्कूलों में शिक्षक समूह बैठकों करके शिक्षण कार्य के अवलोकनों व बच्चों के आंकलन को चर्चा में ला रहे हैं। इससे शिक्षण कार्य के दौरान आयी चुनौतियों के समाधान खोजने का प्रयास होता है। इन बैठकों से संकलित शिक्षकों के ज्ञान को शिक्षकों के बीच चर्चा में लाने के लिए प्रज्ञा बुलेटिन प्रकशित किया जाता है।

PRAGYA Bulletin is a compilation of good practices of teachers of state government schools of Raebareli districts of Uttar Pradesh. It is part of Lokmitra effort to promote teacher’s initiative of peer learning at school, cluster, block & district level. In the 8th year of this effort, 12th issue of bulletin is being published.

 

JanPahal Cover Dec 2014

“सभी बच्चों के शिक्षा हक व बेसिक शिक्षा में बदलाव के लिए जन पहल”– बेसिक शिक्षा मंच की सामयिक बुलेटिन, अंक-3, दिसम्बर 2014

शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के द्वारा ही सभी बच्चों की शिक्षा के हक को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस क्रम में बेसिक शिक्षा मंच पिछले आठ सालों से स्कूल से लेकर जिले व राज्य स्तर पर प्रयासरत है। यह एक अनौपचारिक समूह है जिसमें अभिभावक मंच, स्वैच्छिक संस्थायें, विभिन्न संगठन, शिक्षाविद् आदि जुडे़ हैं। बेसिक शिक्षा मंच स्कूल से लेकर जिले व राज्य स्तर पर विभिन्न घटकों के बीच संवाद अयोजित कर साझी समझ व सामूहिक जिम्मेदारी बढ़ाने का काम कर रहा है। इस दौरान उपजे सुझावों को समेकित कर जनप्रतिनिधियों व सरकार तक पहुंचाने का काम करता है। जनपहल का पहला अंक 2011 में और दूसरा अंक नवम्बर 2012 में प्रकाशित किया गया था। इस बुलेटिन  में शिक्षा के हालातों को दिखाने के साथ-साथ शिक्षा की बेहतरी के लिए सुझाव भी दिये जाते हैं। सरकार की पहल का जमीनी प्रभाव के आधार पर गौर किया जाता है। इसके साथ हीं अभिभावक मंच व स्वैच्छिक संस्थाओं के योगदान को भी प्रस्तुत किया जाता है।

Jan Pahal Bulletin of Basic Shiksha Manch is an advocacy document. This Bulletin has taken place of Guhar Bulletin that was getting published in pre-RTE period. Lokmitra brings it out on behalf of Basic Shiksha Manch for promoting systemic change in education and thus ensuring right of each child to quality education. This Bulletin does the critical review of initiatives of government, highlights critical areas and suggests changes. Bulletin also show-cases the effort of CSOs. Bulletin is taken to Government functionaries, Education Department and People’s Representatives through delegation and through Shiksha Samvad at state & district level.

 

Cover Page Workbook Class 3

“पढने की कुशलता बनाने और उपचारात्मक शिक्षा के लिए कक्षा 3 की अभ्यास पुस्तिका”

बच्चों में हिन्दी भाषा पढ़ने की समुचित दक्षता बना पाना स्कूलों के लिए एक चुनौती बनी हुई है। कुछ सालों की शिक्षा के बाद भी दो तिहाई बच्चों को सरल पाठ पढ़ने में दिक्कत होती है। कक्षा 2 के अन्त तक यह उम्मीद की जाती है कि बच्चे पढ़ने की शुरूआती कुशलता बना लेंगें। इसके आधार पर कक्षा 3 की और ऊपर की कक्षाओं की पाठ्य पुस्तकें विकसित कर बच्चों को दी जाती हैं। परन्तु बोलचाल के शब्दों को भी पढ़ने की कठिनाई से जूझ रहे बच्चों के लिए ये पुस्तकें उनका स्कूली शिक्षा से सार्थक जुड़ाव नही बना पाती हैं। शिक्षक स्वयं को इस बात के लिए मजबूर पाते हैं कि उन्हें पाठ्य पुस्तकों के पाठों को क्रम दर क्रम एक निश्चित समय में पूरा करना है। इस क्रम में अधिकांश बच्चे शिक्षक के साथ नहीं चल पाते हैं। अतः यह सोचना जरूरी होता है कि एक ही पाठ पर किस तरह से शिक्षण कार्य किया जाए जिससे कि बच्चों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार कार्य हो सके। कक्षा 3 और ऊपर की कक्षाओं में अलग-अलग सीख स्तर (जरूरत) वाले बच्चों को उनके अनुरूप अतिरिक्त किताबें मिलने की जरूरत है।

इस क्रम में कक्षा 3 के लिए यह अभ्यास-पुस्तिका बनायी गई है। इसमें कक्षा 3 के पाठ्य पुस्तक के कुछ पाठों को संक्षेप में लिया गया है। इससे पढ़ना सीख रहे बच्चों की जरूरतों के अनुसार उन्हे अभ्यास मिल रहा है। 

 

Cover Page Workbook for OoS Adolescents

“पढ़ें लिखें आगे बढ़ें” शिक्षा केन्द्र एवं शिक्षा शिविर के लिए कार्य-पुस्तिका, भाग – 1

लोकमित्र द्वारा स्कूल बाहर किशोर-किशोरियों को शिक्षा केन्द्रों एवं आवासीय शिविरों के माध्यम से शैक्षिक सहयोग दिया जाता है। इनमें से अधिकांश किशोर-किशोरियाँ प्रथम पीढ़ी के सीखने वाले होते है। इन्हें घर-परिवार में लिखित भाषा से रुबरु होने का मौका कम मिलता है। परन्तु कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखा जाए तो वे भी सहजता से पढ़ना सीख लेते हैं. जैसे की पढ़ने-लिखने के उपयुक्त संदर्भ सामग्री का चयन करना, शिक्षण प्रक्रिया के दौरान इनके अनुभवों को केन्द्र में रखना। शिक्षण प्रक्रिया को इस प्रकार से संचालित करना कि इन्हें हर समय कुछ नया सीखने का एहसास हो एवं खुशी मिले। शिक्षण प्रक्रिया के दौरान शब्द भंडार व बुनियादी दक्षताओं (अवलोकन, स्मृति, संबंध बोध, वर्गीकरण, तर्क, कल्पना आदि) पर विषेष रुप से कार्य करना। इन्हीं बातों को ध्यान रखते हुए यह कार्यपुस्तिका तैयार की गई है।

पढ़ना-लिखना सीखने के दौरान सतत् मूल्यांकन के लिए इस कार्य-पुस्तिका में संकेतक दिये गये हैं। कुछ संकेतक कुशल पाठक बनने के लिए आवश्यक दक्षतायें के आंकलन के लिए हैं. कुछ संकेतक पढ़ना सीखने में सहायक कुशलताओं के आंकलन के लिए। टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट से यह कार्य-पुस्तिका प्रकाशित हुई है.

अभिभावक समिति Abhibhavak Samiti
अभिभावक समिति

अभिभावक समिति 

यह विद्यालय प्रबंध समिति के अभिभावक सदस्यों को संकुल और ब्लाक स्तर पर संगठित करने की किताब है. लोकमित्र अधिकार कानून के लागू होने के पहले से ही इस पर कम करना शुरू किया था और यह अभी भी व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहा है. लोकमित्र के इस लम्बे अनुभव के आधार पर अभिभावक समिति की यह पुस्तिका तैयार की गई है. आशा है की इससे अभिभावक समिति को अन्य क्षेत्रों में फ़ैलाने में मदद मिलेगी.   

This Booklet is on federating School management Committee as Parent Association at cluster & Block level. Lokmitra had evolved this practice during 2005 and after the enactment of RTE Act, this practice has sustained. Based on this long experience this booklet has been prepared in Hindi so that practice of Parent Association further spreads.

 

Cover Page RTE Booklet

Right to Education Booklet For Children बच्चे जानें शिक्षा का अधिकार –  शिक्षा अधिकार के प्रति बच्चों को जागरूक करने के लिए शिक्षक सहायक सामग्री और बच्चों की कार्यपुस्तिका। इसमें करण की कहानी के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के अधिकार के बारे में बताने का प्रयास किया जा रहा है। किताब में दस गतिविधियाँ दी गईं हैं। ये बच्चों और स्कूल के बारे में है। गतिविधियों से स्कूल को अच्छा बनाने में बच्चों की सभागिता बढाने में मदद मिलेगा।

This booklet is supplementary reading material and activity book on Right to Education for Children of Uttar Pradesh. It has a story of a child named Karan who finds that now school has become an interesting place to learn and play. Children are briefly introduced to key provisions of the Act. There are ten group activities for children so as to enable them to assess their school and contribute to school improvement. Teachers can use use this booklet for involving children in making school more effective in ensuring RTE.

Final cover page for web page

‘सभी बच्चों का पढ़ना सीख पाना – चुनौती से संभावना की ओर’ 

सभी बच्चे देर सबेर पढ़ना सीख सकते हैं पर हमें ऐसा होते हुए नहीं दिखता है। स्कूलों में बच्चों में पढ़ने की दक्षता बढ़ा पाने की गंभीर चुनौती के संदर्भ में ‘बच्चों का पढ़ना सीखना – चुनौती से संभावना की ओर’ पुस्तिका विकसित की गई है।

बच्चों की शिक्षा और उनका सीखना एक ऐसा विषय है, जिस पर हम सभी के पास अनुभव होते हैं। साथ ही होती है एक मजबूत राय। इसके बावजूद भी हमें बच्चों के साथ ऐसा कर पाने में दिक्कत होती है जिसमें बच्चे का सहज तरीके से सीखना हो पाये। उस तरह से सीखना जिसमें बच्चे की रुचि और जरूरतों का ध्यान रखते हुये उसके सीखने को उपयुक्त सहारा दिया जा रहा हो, जिससे बच्चा अपने ज्ञान बनाने की सीढ़ी पर चढ़ता जाये और इस प्रयास में आनंद की अनुभूति करे, सीख पाने की क्षमता बढ़ा पाये।

‘बच्चों का पढ़ना सीखना – चुनौती से संभावना की ओर’ पुस्तिका में यह कोशिश की गयी है कि शिक्षक भाषा शिक्षण की चुनौतियों के कारणों को समझ सकें और बच्चों को पढ़ना सीखने के बेहतर अवसर दे सकें। जमीनी हकीकत से उपजे संवाद को शिक्षाविदों के सिद्धांतों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इस क्रम में उपलब्ध संबंधित साहित्यों का उपयोग किया गया है। विश्लेषणात्मक तरीके से अनुभवों व विचारों को रखा गया है, जिससे की पढ़ते हुए अपने ज्ञान को सुव्यवस्थित करने, नया ज्ञान बनाने में मदद मिले। बच्चों के भाषायी विकास की चुनौतियों को लेकर लोकमित्र के कार्यकर्ता ने बच्चों के बीच पहल की है, शिक्षकों के बीच संवाद को आगे बढा़ पाये हैं। कक्षा में बहुस्तरीय स्थिति के संदर्भ में विशेष प्रयास हुआ है। इसी के परिणाम स्वरूप यह पुस्तिका बन पायी है।

Cover page अभिभावक और शिक्षक का साझा प्रयास

“अभिभावक और शिक्षक का साझा प्रयास – सभी बच्चों के सीखने का हक हो साकार”

शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में बदलाव को बढ़ावा देने की तमाम जटिलताओं एवं आशा-निराशा के बीच हम प्रयास करते रहते हैं। उम्मीद है कि बदलाव के प्रयास में जुड़े सभी लोगों को, विषेष कर शिक्षकों और अभिभावकों को यह पुस्तिका उपयोगी लगेगी।

सभी बच्चों की शिक्षा के हक को सुनिश्चित करने के केन्द्र में शिक्षक और अभिभावक हैं। लोकमित्र यह मानता है कि उनके साझा प्रयास से हीं बदलाव संभव है। लोकमित्र के पिछले कई सालों के प्रयासों के दौरान बनी समझ से यह पुस्तिका विकसित हुई है। इस पुस्तिका में वर्णित कई नवाचारों को लोकमित्र उत्तर प्रदेश में बढ़ावा दे रहा है। इस पुस्तिका के बनने में लोकमित्र के कई साथी सीधे तौर पर जुड़े रहे हैं। अप्रत्यक्ष रूप से कई शिक्षक, अभिभावक और स्वैच्छिक क्षेत्र के अन्य लोगों का भी योगदान रहा है।

Cover Page Dhruvtara

रायबरेली जिले में लोकमित्र के द्वारा 2002 से एक पहल की शुरूआत की गई जिसमें अभिभावकों की स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य संकुल एवं ब्लाक स्तर पर अभिभावक मंच का गठन किया गया. अभिभावक मंच से अभिभावकों का एक दूसरे के अनुभवों से सीखने-सिखाने की व्यवस्था बन पायी, इनकी आवाज को मजबूती मिल पायी। इसके आधार पर ये शिक्षा तंत्र की जवाबदेही के लिए जनप्रतिनिधियों एवं राजनितिक पार्टियों के माध्यम से व्यवस्थागत बदलाव के लिए प्रयास करते रहे हैं। ये अभिभावक स्कूल से लेकर ब्लाक तक संगठित होकर पूरी व्यवस्था में बदलाव लाने में ध्रुवतारा की तरह एक दिशा दिखा रहे हैं।

रायबरेली जिले के सात विकास खंडों में करीब 400 स्कूल प्रबंधन समिति तथा तीन अभिभावक मंच (डीह, राही एवं सलोन विकास खंड) के सफल क्रियाशीलता के साथ बढ़ रहे इस सफल प्रयास के अनुभवों को कहानी के रुप में 2008 में लिखा गया था तथा ‘ध्रुवतारा’ नाम से हीं प्रकाशित किया गया था। इसका पुनः प्रकाशन 2010 और 2013 में किया गया। पुस्तिका के कहानी में आये सभी पात्र व घटनाएं सच्ची है।

शिक्षा अधिकार कानून में स्कूल प्रबंधन समिति को महत्वपूर्ण स्थान मिलने तथा इस कानून के तहत धीमी प्रगति के मद्देनजर यह पुस्तिका और भी ज्यादा संदर्भित व उपयोगी लगती है।

Poster - Behtar Shiksha Haq Abiyan Aug 2013 compressedPoster to support New SMC Formation August 2013 Compressed

Cover Janpahal

“सभी बच्चों के शिक्षा हक व बेसिक शिक्षा में बदलाव के लिए जन पहल” – बेसिक शिक्षा मंच की सामयिक बुलेटिन, अंक-2 नवम्बर 2012

शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के द्वारा ही सभी बच्चों की शिक्षा के हक को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस क्रम में बेसिक शिक्षा मंच पिछले पांच सालों से स्कूल से लेकर जिले व राज्य स्तर पर प्रयासरत है। यह एक अनौपचारिक समूह है जिसमें अभिभावक मंच, स्वैच्छिक संस्थायें, विभिन्न संगठन, शिक्षाविद् आदि जुडे़ हैं। बेसिक शिक्षा मंच स्कूल से लेकर जिले व राज्य स्तर पर विभिन्न घटकों के बीच संवाद अयोजित कर साझी समझ व सामूहिक जिम्मेदारी बढ़ाने का काम कर रहा है। इस दौरान उपजे सुझावों को समेकित कर जनप्रतिनिधियों व सरकार तक पहुंचाने का काम करता है। इस कड़ी में जनपहल का दूसरा अंक नवम्बर 2012 में प्रकाशित किया गया। इसका पहला अंक 2011 में बेसिक शिक्षा मंच के सम्मेलन में जारी किया गया था। जनपहल में शिक्षा के हालातों को दिखाने के साथ-साथ शिक्षा की बेहतरी के लिए सुझाव भी दिये जाते हैं। सरकार की पहल का जमीनी प्रभाव के आधार पर गौर किया जाता है। इसके साथ हीं अभिभावक मंच व स्वैच्छिक संस्थाओं के योगदान को भी प्रस्तुत किया जाता है।