बेहतर शिक्षा हक अभियान

“बेहतर शिक्षा हक अभियान”
बेहतर शिक्षा की बात – सक्षम विद्यालय प्रबन्ध समिति के साथ

नवीन विद्यालय प्रबन्ध समिति के गठन का आदेश 1 अगस्त 2013 को जारी हो गया है। इस संदर्भ में ‘बेहतर शिक्षा हक अभियान’ चलाया जा रहा है जोकि पैक्स कार्यक्रम सहायतित प्रयास है। इसमें उत्तर प्रदेश के 18 पार्टनर मिल कर 16 जिलों में प्रयास कर रहे हैं। इस अभियान के तहत नवीन विद्यालय प्रबन्ध समिति का जनतांत्रिक तरीके से गठन और उसके बाद क्षमतावृद्धि का कार्य किया जायेगा। इस अभियान का मुख्य नारा हैः ‘बेहतर शिक्षा की बात – सक्षम विद्यालय प्रबन्ध समिति के साथ’।

अभियान समाग्री को लोकमित्र विकसित कर रहा है। लोकमित्र द्वारा पोस्टर व पैम्फलेट प्रकाशित किया जा रहा है। इस बीच आप अपने क्षेत्र में प्रयास शुरू कर चुके होंगे। आपकी सुविधा के लिए बेसिक शिक्षा मंच और लोकमित्र के वेबसाइट पर जल्द ही सामग्रियों को अपलोड कर दिया जायेगा। साइट हैं ‌‌- www.basic-shiksha-manch.net/विद्यालय-प्रबन्ध-समिति/ और https://lokmitra.org.in/programs/बेहतर-शिक्षा-हक-अभियान

आदेश में लोकमित्र/बेसिक शिक्षा मंच की ओर से दिये गये कई सुझावों को सरकार द्वारा शामिल किया गया है। जैसा कि सुझाव दिया गया था, गठन में कोरम (50 प्रतिशत) की बात की गई है। एम.डी.एम. के रसोईये अब सदस्य नही हो सकते हैं। साथ ही सुझाव के अनुसार गठन के एक सप्ताह के अन्दर सदस्यों की सूची स्कूल के दीवार पर प्रदर्शित करनी होगी। इसके अलावा सरकार ने प्रक्रियागत कुछ बातें भी मानी हैं। जैसे कि स्वैच्छिक संस्थाओं को जोड़ने की बात की गई है। साथ ही गठन के काम के प्रबंधन में जिला अधिकारी के अलावा खंड विकास अधिकारी को जोड़ा गया है। इनके द्वारा हरेक ब्लाक व संकुल के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाना है तथा गठन की तारीखें भी तय होनी है।

उत्तर प्रदेश के अन्य सभी जिलों में आक्सफैम इंडिया के सहयोग से लोकमित्र यह प्रयास करेगा कि नवीन विद्यालय प्रबन्ध समिति का जनतांत्रिक तरीके से गठन हो। यह प्रयास बेसिक शिक्षा मंच और स्कोर जैसे गठबंधन के अगुआयी में संचलाति किया जायेगा। बेसिक शिक्षा मंच और स्कोर की बैठक लखनऊ में 12 अगस्त को प्रस्तावित है।

आदेश पत्र के अनुसार समिति का गठन 16 अगस्त से 5 सितम्बर के बीच की जानी है। गठन के आदेश में शिक्षकों को सूचना पहुंचाने और उन्हें समिति के बेहतर गठन के लिए संवेदित करने को लेकर कुछ नहीं कहा गया है। गठन की प्रक्रिया को जनतांत्रिक और सफल बनाने के लिए हमें कई तरह के प्रयास करने होंगे। इस संदर्भ में बेसिक शिक्षा मंच के मार्च व जून में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यषाला और जिला स्तरीय शिक्षा संवाद में काफी चर्चा हुई है। पैक्स पार्टनर की 5 अगस्त कि बैठक में गतिविधियां तय की गइ हैं। अपने प्रयास निम्न तरह से बढ सकते हैं।

  • संस्था कार्यकर्ताओं का अभिमुखीकरण व क्षेत्र का निर्धारण। संकुल स्तर पर वोलंटियरों की टीम तैयार करना जिससे कि वे गठन की प्रक्रिया में सहयोगी बनें।
  • जिले और ब्लाक पर शिक्षकों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों व समिति के वर्तमान सदस्यों की  कार्यशाला करना जिससे कि उन्हें संवेदित किया जा सके।

शिक्षा का सरोकार और विद्यालय प्रबन्ध समिति का महत्व

आइये नवीन विद्यालय प्रबन्ध समिति के गठन को एक अवसर के रूप में लें और जनतांत्रिक तरीके से समिति के गठन को सुनिश्चित कर स्कूल बेहतरी की बुनियाद डालें।

शिक्षा जनतंत्र की नींव को मजबूत करती है। सामाजिक एवं आर्थिक विकास का आधार बनती है। शिक्षा से ही, संविधान की मंशा के अनुसार, न्याय, समता, धर्म निरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित समाज का निर्माण हो सकता है।

‘निःशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार कानून’ 6-14 वर्ष के सभी बच्चों के सीखने के हक को सुनिश्चित करने के हमारे सामाजिक सरोकार को मजबूती प्रदान करता है।

कानून के तहत बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जून 2011 को विद्यालय प्रबन्धन समिति के गठन का पहला शासनादेश जारी किया गया था। इसके अनुसार स्कूलों में 15 सदस्यीय समिति का प्रावधान किया गया। 11 सदस्य बच्चों के माता-पिता (6 महिला) और शेष 4 पदेन सदस्यों में शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि, लेखपाल, ए.एन.एम. हैं।

सभी बच्चों के सीखने के हक को सुनिश्चित करने के लिए स्कूल में ऐसी व्यवस्था खड़ी करने की जरूरत है जहां शिक्षक और अभिभावक मिलकर विचार करते हों। स्कूल के विकास व प्रबंधन में कई समस्यायें आती हैं। इसके लिए शिक्षक तथा समिति के सदस्य मिल कर प्रयास करें तो बेहतर समाधान निकाल सकते हैं।

‘विद्यालय प्रबंध समिति’ को सिर्फ शिक्षकों के जवाबदेही के लिए देखना एक भूल होगी। यह देखा गया है कि बेहतर शिक्षा की मांग जब समाज से उठकर राजसत्ता तक जाती है तो शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन व समुचित व्यवस्था हो पाती है।

यह समिति प्रभावी हो पाये इसके लिये जरूरी है कि समिति का गठन अभिभावकों की आम सहमति से हो। शिक्षक इसकी जिम्मेदारी सामाजिक कार्यकर्ताओं व अभिभावकों की मदद से बेहतर निभा सकते हैं।

आईये निम्न तरीके से समिति का गठन करने का प्रयास करें।

बैठक की तैयारी –

  • बच्चों के माध्यम से समिति गठन के तारीख की सूचना देना। इसके लिए हरेक कक्षा में समिति के गठन की तारीख व समय बोर्ड पर लिखना।
  • 15 अगस्त को झण्डा रोहण के दौरान अभिभावकों को शिक्षा अधिकार कानून, विद्यालय प्रबंध समिति एवं इसके गठन के बारे में बताना। बैठक के आयोजन के लिए अभिभावकों एवं पंचायत सदस्यों से मदद लेना। (नये प्रावधानों के बारे में बताना)
  • शिक्षक समूह द्वारा बैठक संचालन व व्यवस्था की तैयारी करना।

बैठक के दौरान –

  • अभिभावकों को कक्षावार बड़े घेरे में बैठाना एवं कोरम (50 प्रतिशत अभिभावक) की पूर्ति हेतु प्रयास करना।
  • शिक्षक द्वारा शिक्षा अधिकार कानून के मुख्य प्रावधानों के बारे में बताना, जैसे कि बच्चों को मिले अधिकार, विद्यालय प्रबंध समिति के अधिकार एवं कर्तव्य, शिक्षक के दायित्व, शिक्षा की गुणवत्ता, अधिकार हनन का निवारण।
  • शिक्षक द्वारा विद्यालय प्रबंध समिति का महत्व तथा बेहतर समिति के गुणों पर चर्चा।
  • विद्यालय प्रबंध समिति सदस्य के चयन के मापदण्ड एवं प्रक्रिया पर चर्चा।
  • कक्षावार समूह मंे, पूर्व में चयनित सदस्यों से यह जानना कि समिति के प्रयास कैसे रहे। वे स्वयं क्या प्रयास किए। स्कूल बेहतरी के लिए कैसा सदस्य चुनना बेहतर होगा।
  • कक्षावार समूह में सदस्यों का चयन – प्राथमिक स्कूलों में कक्षा-1 से 2 महिला व 1 पुरुष तथा अन्य प्रत्येक कक्षाओं से 1 महिला व 1 पुरुष का चयन। पूर्व माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 6 एवं 7 से 4-4 अभिभावक (2 महिला व 2 पुरुष) तथा कक्षा 8 से 2 महिला व 1 पुरुष का चयन। 
  • बड़े समूह में हाथ उठा कर आम सहमति या बहुमत से चयन को सुनिश्चित करना।
  • चयनित सदस्यों को गोल घेरे में बैठाकर अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन (1 महिला व 1 पुरुश)। यह बेहतर रहेगा कि प्राथमिक स्कूलों में कक्षा 1 से 3 एवं पूर्व माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 6 एवं 7 से अध्यक्ष का चयन हो। अध्यक्ष व उपाध्यक्ष में से एक सदस्य अल्पसंख्यक या अनुसुचित समुदाय से हों।
  • चयनित सदस्यों की घोषणा करते हुए गठन की कार्यवाही लिखना। कोरम के साथ-साथ सभी की सहमति को दिखाने के लिए सभी अभिभावकों का हस्ताक्षर लेना।
  • विद्यालय प्रबंध समिति की मासिक बैठक का दिन निश्चित करना। (जैसे कि माह का पहला सोमवार)
  • चेतना गीत एवं सभी बच्चों के हक दिलाने के संकल्प के साथ बैठक का समापन।